आजाद भारत का सफर 

आजादी उपरांत भारत माता के
पांव से जंजीर तो खोला दिया गया पर अब बांध दिया गया हाथों में जय हिन्द

नमस्कार सबसे पहले तो आप सभी को
इस वर्ष आज़ादी के तिहत्तरवे स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। 🇮🇳जय मां मातृभूमि, भारत माता की जय वन्दे मातरम् 🇮🇳। गलत कहा जाता है हमारे देश में एक गीत के रुप में दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल,ऐसा कैहना बिल्कुल गलत इससे क्रांतिकारीयों का अपमान है। जी हां हमें आजादी इस तरह से तो बिल्कुल ही नहीं मिला है न जाने कितने मां ने अपने बेटे और बहन ने अपने राखी खोया है। आजादी हासिल करने में केवल उन महानायकों का योगदान है जिन्होंने मिट्टी को माथे पर तिलक लगाकर तलवारों के नोक पर चढ़कर लङा है। मरते वक्त भी अपनी प्राण लूटाते भारत मां के कानों में कह गया,हे मां मुझे माफ़ करना मुझसे तेरी सेवा बस इतना ही हो सका। आइए हम जानते हैं इन महफूज हवाओं के उस समय के मनहूस समय को जब हम जन्मे तो नहीं थे पर बुजुर्ग कैहते हैं हमारी देश कैसे जंजीरों से आजाद हो सका। हमारा देश एक एक लम्बे समय से आक्रांताओं से लङते आया है पहले मुग़लों से फिर अंग्रेजों से लङा बहुत समय बिता इस परिस्थिति से निकलने में। जब हम अंग्रेज़ो को खदेर कर भगाने के बाद आजादी के जश्न को सोच ही रहे थे तभी मुगलों के ख़ून में पाए जीवन को जीवन कैहने वाले अपने आपको मुसलमान कैहने वालों के तरफ़ से आवाज आया हमें बांट दो। अंग्रेजों का लगाया यह आग और गांधी के शांतिपूर्ण ढंग से निर्णय ने देश को धार्मिक रुप से बांट दिया एक तरफ पाकिस्तान दूसरी तरफ हिंदूस्थान। गांधीजी के जीवन में यह सबसे बड़ी भूल हो गया कि जिस हिसाब से देश को धार्मिक रुप से खंडित किया गया था वो पूरा पूरी सफल नहीं हो सका। गांधी की हत्या करने वाला नाथूराम गोडसे ने अपने आखिरी ब्यान में पूरी तरह से गांधी नीति का विश्लेषण कर दिया जिसको मानने वाले कि संख्या बढ़ती ही गई। इस तरह भारत जैसे विशाल राष्ट्र का अस्मिता छीनता चला गया शायद आने वाला समय इन सभी तथ्यों को बारिकी से देखना चाहेगा। आज वो सभी काम जो पहले अंग्रेजों और मुगलों के द्वारा किया जाता था। आज भारत माता के कोख में पलने वाला अपने आपको भारत माता के बेटा कहने वालों के द्वारा किया जा रहा है।
भारत एक आजाद देश है‌। मैं डिक्शनरी के इस शब्द को तहे दिल से सैल्यूट करता हूं क्योंकि यह वह देश है जहां अलग अलग धर्म रहने के बावजूद भी हम सब भारत माता के संतान हैं। अंग्रेजों के गुलामी से भारत माता के पांवों में बंधी जंजीर को तोङ हटा कर एक आजाद वतन बनाने वाले भारत के वीर सपूतों को प्रणाम। इस देश के पंक्षी का चहचहाना यहां के रहने वाले अंतिम व्यक्ति का सुकून यह अमन-चैन से लेने वाला सांसें की तरफ से आप सभी अमर बलिदानी, शहिदों जवानों क्रांतिकारीयों को कोटि-कोटि नमन करता है। हम गर्व है से कैहते हैं हमरा देश भारत है। अगर आप इस देश के मिट्टी में पैदा हुए तो आपको कुछ चीजों के बारे में अवश्य जाननी चाहिए आपको अवश्य पता होना चाहिए हमारा आज का भारत का भविष्य कैसा था। हमें यह सब जानकारी इसलिए भी होनी चाहिए ताकि आने वाले भविष्य के किसी समस्या को लेकर तैयार रह सकें। मित्र मुझे नहीं पता आप इस आर्टिकल को पढ़ते समय क्या सोच रहें होंगे परंतु मैं आपको यह कहना चाहता हूं कि मैं बुनियादी तथ्यों के बारे में बातें कर रहा हूं। भारत को सोने का चिङियां कहा जाता था ऐसा इसलिए क्योंकि यह देश दुनिया का एक अनोखा देश था।वैदिक सभ्यता के क्षेत्र छाया में वैद से किसान तक फलते फूलते थे मगर मुगलों का बारम्बार आक्रमण और अंग्रेजी इतिहासो का कालाखंड इसे नशनाभूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। इतिहासकारों का मानना है हमारा भारत आज के भारत से कई ज्यादा गुना सशक्तत मजबूत और आर्थिक स्थिति में बेहतर था मगर यह सब कुछ धिरे धिरे बदलता गया। हम आज खुशहाल हैं आजाद हैं क्योंकि हमारा देश को अंग्रेजी हुकूमत के चंगुल से आजाद करवा दिया गया है। आइये अब हम चलते हैं भारत के आजादी की ओर सन् 1600 इस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी आया और फिर उसके बाद शुरू हुआ अंग्रेज़ी हुकूमत जिसने भारत को अपने गिरोह में रखना शुरू कर दिया था।
मंगल पांडे वह पहला क्रांतिकारी थे जिन्होंने आजादी की ज़ंग छेङ दिया और फिर आजादी के यज्ञ का पहला आहुति शहिद मंगल पांडेय हुए। फिर काफिला बढ़ता गया धुंध घुंआ में बदलता गया और फिर चंद्रशेखर आजाद भगतसिंह राजगुरु सुखदेव और तमाम क्रांतिकारीयों ने ऐसा बिगुल बजाया कि अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। जब हम भारत का नाम लेते हैं तो चर्चा होता है उस भारतवर्ष का जहां ऋषि मुनियों ने इसे अनमोल धरोहर बनाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। ऋषि-मुनियों का यह देश जहां वैदिक शिक्षा और अलौकिक सांस्कृतिक विरासत वाला सभ्यता का जन्म हुआ हम ऐसे देश के वासी हैं। ऐसा माना जाता है आधी पृथ्वी भारत था दुनिया के तमाम विद्वानों का गढ़ भारत ही था। दुनिया के अन्य प्रांत का जो सब से विलक्षण प्रतिभा रखने वाला व्यक्ति होते थे वो भी भारत के गुरु का शिष्य से शास्त्रार्थ नहीं कर पाते थे। इस देश के संस्कृति पर काल तब मंडराने लगे जब यहां आक्रांताओं ने भारत के संस्कृति पर प्रहार किया। वे अपना लक्ष्य इस तरह बनाएं की हम भारत के राजाओं-महाराजाओं से युद्ध तो जीत नहीं सकते हैं। यहां के आर्थिक नीति,व्यवसायिक ढंग से या ज्ञान के माध्यम से तो भारत को हरा नहीं सकते इसलिए उन्होंने भारत के लोगों के मन में जातिगत द्वेष और वेद का दुष्प्रचार करने लगें। इस देश के अखंडता को समाप्त करने का प्रयत्न उनका सफल रहा क्योंकि वे भारत के एक अंग को एक तरफ से काटते जा रहे थे। उन्होंने एक नया तरकीब अपनाया उन्होंने चुपके-चुपके गलत तरीको से धर्म परिवर्तन करवाने लगे और जैसे जैसे उनकी संख्या बढ़ता गया वो और प्रखर उतरने लगे। इस देश को आक्रांताओं ने छल करके काटने बांटने की कोशिश किया कि बहुत सी लोग उनके नस्ल की भाषा बोलने लगें। वैदिक सभ्यता का मजबूती इस तरह था मानों करोड़ों देवि देवता का आशीर्वाद उनके हाथों से झहर रहा हो परंतु अताताइयों ने सबकुछ नष्ट करने का मन बना कर आया था। यहां तक कि उन्होंने भारत के लोगों के मन ज़हर फैलाने का काम किया अंततः ब्राह्मणों पर ज्ञानी होने का अपराधीकरण तथा राजपूतों को अपने लिए स्वावलंबी का उपाधी दे दिया गया। लेकिन इतिहास साक्षी है इन्होंने अपने आन बान शान के लिए अपने मातृभूमि के लिए लङते लङते आज जनसंख्या के अनुपात में ४,५% पर आ अटके हैं। वैदिक सभ्यता का विकास रुकते ही विश्वगुरु बनने का सपना भी कहीं औंध सा गया अब केवल आर्थिक विकास दर को मुख्य धारा में माना जाता है।
आजाद भारत का सफर
इस देश कि मिट्टी आज भी गुनगान करती है उन अनमोल पुत्र पुत्री को महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, रानी पद्मिनी, राजा रतन सिंह और न जाने कितने लाखों वीर सपूतों को। आज भी इनके वंशज जीवित हैं आज भी इनके रौंगटे खड़े हो जाते हैं जब कभी भी आज भी जब देश के लिए जान पर बाजी लगाने की बात होता है। एक देश के लिए सौभाग्य का बात तब होता है जब वहां के रहने वाले एक एक व्यक्ति अपने मातृभूमि के लिए प्राण गंवाना भी गर्व की बात समझता है। दुनिया के करीब  जानते हैं भारत आज कल का तो नहीं ही है आपकै अपने देश के बारे में अवश्य जाननी चाहिए। दोस्तों आप भी कभी कभार सोचते होंगे देश आजाद हुआ अहिंसा के बल पर या शान्ति के बल पर?
मुझे तो नहीं लगता और आपको भी नहीं लगता होगा। मगर हां गांधी के योगदान को हम भूला नहीं सकते उन्होंने भारत के तरफ़ से दुनिया को एक जबरदस्त शान्ति का पैगाम दिया निस्संदेह इससे भारतवर्ष का एक नया छवि विश्व को पहुंचा। वैसे तो अलग अलग लेखकों का अलग अलग मत है किसे सही ठहराया जाए और किसे गलत इस बात पर बहस लम्बे समय तक हो सकता है। ऐसा मेरा मानना है कि देश को आजादी क्रांतिकारी कदमों पर चलकर मिले हैं ना कि दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल। इसलिए भारत माता के आजादी का श्रेय उन महानायकों को जाता है जिन्होंने अपना सर्वस्व मातृप्रेम में हंसते हुए न्योछावर किया।
आजादी कैसे मिला?
साथियों आपको यह जानकर हैरानी होगी हमारे देश को आजाद कराने में न जाने कितने हज़ार कितने लाख क्रांतिकारीयो ने अपना प्राण गंवाया।आज हम आजाद हैं तो केवल उन क्रांतिकारी उन बलिदानी शहिदों के कारण अतः आज ही हमें संकल्प करना चाहिए हम अपने वीर सपूतों के शहादत को कभी नहीं भूलेंगे। मैं यहां यह भी कैहना चाहता हूं जिस देश ने अपना अतीत भूला है उसका इतिहास केवल कागज के टुकड़े पर ही सिमट कर रह गया है। बहुत दुख के साथ परंतु कैहना पङ रहा है हम एक मानसिक झुंझलापन और नेताओं के गुलाम बनकर रह गए हैं। समाज को तितर-बितर करने में कोई कसर नहीं छोड़ा था गोरे अंग्रेजों ने मगर बचें खुचे कसर को आज नेताओं के इशारे पर इसी समाज के द्वारा किया जा रहा है। भारत माता के पुत्रो ने पांव से जंजीर तो आज़ाद कर दिया परन्तु हाथ में जंजीर बांध दिया गया मित्रों आरक्षण रुपी राक्षस एक प्रकार का जंजीर ही तो है जो आपस में आग लगाता है और मेधावी को आगे बढ़ने से रोकता है। हमारा देश पूरी  तरह से आज भी आजाद नहीं हुआ है हम एक तरह से ऐसा कैह सकते हैं शैक्षणिक व्यवस्था का जो प्रणाली  है वो बिल्कुल ही निर्थक आधार पर बनाई गई है। जातिगत आरक्षण ने न जाने कितने प्रतिभाओं का गला घोंट दिया है अब तक अतः अब तो सबकुछ महफूज है। दूसरी बात अगर आप शिक्षा में आरक्षण देते हैं तो जरा सोचिए अपने देश को बुनियादी ढ़ंग से कितना कमजोर कर रहे हैं। इस पंद्रह अगस्त भारत के 73 वें स्वतंत्रता दिवस पर हम सब यह संकल्प लें कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाएंगे चमकता सम्राट होगा फिर अपना भारत।आओ मिलकर पुनः विश्वगुरु बनाएं भारत माता को।
आजाद भारत का सफर
हमारे पुरखों ने यह स्वप्न देखा होगा उनके मन की आंखों में एक सपना होगा हम आजाद वतन में सांस लें सकेंगे। आज जो कुछ हो रहा है उसका कभी भी उन्होंने कल्पना नहीं किया होगा उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा आरक्षण की बेङिया मां भारती के हाथों में बांध कर, लोगों को बैसाखी के सहारे मजबूत बनाया जाएगा। दरअसल इन सभी अनैतिक खोखलापन से हमारा देश अभी तक आजाद नहीं हो पाया है। क्या केवल अंग्रेजों का भारत छोड़ना और पाकिस्तान पृथक का रास्ता से भारत आजाद हो गया? नहीं बिल्कुल नहीं आज के दौर को देखकर हम कैह सकते हैं हमने राजनीतिक आकांक्षाओं का ऐसे जाल का शिकार होने जा रहे हैं जिन सबका स्पष्ट झलक देखने में आ रहा है किसी ना किसी रूप में। भारत माता के सभी पुत्रों पुत्रीयों यह जान लो आजादी मुफ्त में नहीं मिला है हमने एक बङी किमत चुकायी है।
जय मां भारती वंदे मातरम