दिसंबर मास के २५ तारिख को भारत वर्ष के उल्लेखित तिथि में एक गौरव गाथा के रुप में सुनहरा दिन माना जाता रहेगा।
अटल बिहारी वाजपेयी: एक अटल कथा
अटल अमिट है जिनका छाप सदियों सदियों तक रहेगा। कभी नहीं मिट सकेने वाले शख्स का नाम होगा श्री अटल बिहारी वाजपेई जिन्होंने नरेंद्र मोदी जैसा भारत का प्रधानमंत्री दे गये। जी हां आप पढ़ रहे हैं एक ऐसे शख्सियत के बारे में जिन्होंने भारतवर्ष में चाणक्य के बाद सबसे बड़ा राजनेता हुए। वर्तमान भारत के भीष्म पितामह भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जिनका जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साधारण शिक्षक परिवार में 25 दिसंबर 1924 जन्म हुआ था। बचपन से पढ़ने लिखने का शौक उन्हें एक शिक्षित समाज का जिम्मेदार व्यक्ति बनाया। कलमों की धार ही उन्हें एक महान कविश्रेष्ठ व्यक्तित्व का परिचय विश्व से करवाया था। मां हिन्दी को विश्व भर में ख्याति प्राप्त करवाकर भारत का डंका बजाने वाले प्रख्यात पुत्र अटल को कौन भूल सकता है। उनका भी बचपन अन्य क्रांतिकारी नक्शे कदम को व्यक्त करता है वे बचपन से देखते आ रहे थे कैसे भारत मां के पैरों में बंधी हुई है बेङियां। सावरकर को स्पष्ट शब्दों में व्याख्या करने वाले, आपातकाल के समय जेल को भी खास बनाने वाले का नाम था वाजपेई। 

अटल बिहारी वाजपेयी: एक अटल कथा

भारतीय जन संघ का संस्थापक सदस्य थे श्री अटल बिहारी वाजपेई
1968 से 1972 तक BJS का प्रेजिडेंट के रुप में पद पर थे  बाद में जन संघ एक जनता पार्टी से जुड़ गया और 1977 में general election भी जीता था। मोरारजी देसाई जो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री थे उनके कार्यकाल में श्री वाजपेई जी मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स के रुप में थे। उन्होंने सन् 1979 में रिजाइन दिया और फिर उदय हुआ भारतीय जनता पार्टी का सन् 1980 में और इसके प्रथम प्रेजिडेंट भी बनें वाजपेई जी।
उनके कार्यकाल में Pokhran-2, Kargil war, traveling to Lahore जैसे अनगिनत काम हुए। अटल बिहारी वाजपेई वह पहला नेता थे जो भारत के नन कांग्रेस प्रधानमंत्री बनें और सबसे बेहतरीन होने का अमिट प्रतिक्रिया भारत के जनता जनार्दन दे रहे हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी: एक अटल कथा
उनके बारे में जीतना लिखा जाए वह कम है वो एक RSS समर्थक थे। भारतीय जनता पार्टी का नींव रखने वाला उनके प्रिय मित्र लाल कृष्ण आडवाणी का आज भी आंख छलक उठता है जब कभी अटल बिहारी वाजपेई जी जिक्र होते हैं। उनका राजनीतिक सफर में सबसे पहले बार प्रधानमंत्री के रूप में 1996 में 13 दिन के लिए बनें थे लेकिन बहुमत नहीं होने के कारण सरकार गिरा दिया गया था। एक फिर से 13 महिने के लिए सरकार बनाने का मौका दिया भारत के जनता जनार्दन ने लेकिन पुनः सरकार तेरह महीने बाद गिर गया। सौभाग्य देखिए उस पार्टी और भारत के जनता का जिन्होंने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी को वोट दे कर अटल जी को अगले पांच वर्षों के लिए में प्रधानमंत्री बनें। इस बार पूर्ण बहुमत हासिल कर के सदन में पहुंचें थे। इस पंचवर्षीय कार्यकाल में जो 1999 से 2004 तक के लिए उन्हें तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बना कर देश उनके हाथों सौंप दिया।



विश्लेषज्ञो का ऐसा मानना है कि अटल बिहारी वाजपेई वास्तव में जो करना चाहते थे उनके लिए यह कार्यकाल बहुत ख़ास बना। श्री अटल जी के कार्यकाल में जो सांसद रहें हैं और जिन्होंने उस समय के राजनीतिककाल को देखा है वो आज भी कैहते हैं अटल जी आधुनिक भारत के राजनीति का भीष्म पितामह रहें हैं ‌। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हीं का शिष्य हैं आपने कयी बार मोदी जी के द्वारा चर्चा में सुने होंगे कि उनके पिता समान थे श्री वाजपेई। शारीरिक अस्वस्थता के कारण श्री वाजपेई जी 2009 में सक्रिय राजनीति से सदैव के लिए अवकाश ले लिए।
अपने राजनीतिक जीवन में जो उन्होंने सबसे बड़ा काम किया वो ये था कि विपक्ष भी इसी देश के राजनीति का हिस्सा है |अतः उन्हें भी साथ लेकर चलना जिसके लिए वो सदैव राजनीति के भीष्म पितामह माना जाते रहेंगे वो उनका शालिनता था और नैतिकता का बुनियादी जो उन्हें सही इमानदारी पूर्ण निर्णय लेने में मदद करता था। ऐसा कहा जाता है कि उनमें ऐसा कला था कि वो विपक्ष का भी दिल जीत लेते थे शब्दों के वाणों से सचमुच वो कमाल थे। आजकल जब टेलिविजन पर बैठे कर सदन की कार्यवाही देख रहें होंगे तो आपको भी अक्सर दुःख होता होगा कि पता नहीं क्या चल रहा है। वह समय कुछ और था जब सभी मंत्री तक को इंतजार होता था कि कब अटल बिहारी वाजपेई जी सदन में कुछ बोलेंगे। उन्हें कुछ कैहना होता था विपक्ष से तो हंसी-मजाक में अपने कविता के माध्यम से जवाब दे दिया करते थे सचमुच वो भारत मां के कर्तव्यनिष्ठ पुत्र थे‌।
शारीरिक अस्वस्थता के कारण 16 अगस्त 2018 को उनका देहान्त हो गया
सत्य ही कहा गया है किचङ में फूल खिलाने वाले का नाम हमेशा रहेगा अटल बिहारी वाजपेई बन कर।