INDIA

भारत एक सनातन संस्कृति का अनोखा देश

जब अब्राहम लिंकन भारत आ रहे थे तो उनकी मां ने कहा था बेटा भारत जा रहे हो वहां महाराणा प्रताप के मेवाङ से ज़रा सा मिट्टी लेते आना, मैं उसके मां को प्रणाम करना चाहती हूं जिसने प्रताप जैसा पुत्र पैदा किया। जी हां हम उसी गौरवशाली विश्व के महान संस्कृति वाला भारत का रहने वाले हैं।

मेरा ऐसा मानना है आधी पृथ्वी आज भी भारत का अनुसरण करती है
भारत कि आजादी हजारों क्रांतिकारीयो के बल पर मिला है मैं नहीं समझता आजादी का सम्पूर्ण श्रेय गांधी को ही मिलना चाहिए था। भगतसिंह को कौन भूल सकता है,कौन भूल सकता है राजगुरु सुखदेव को? केवल 23 वर्ष के उम्र में हंसते हुए देश प्रेम में फांसी पर लटक गये इतिहास कैहता है हजारों क्रांतिकारी जान गंवाए हैं तभी आजादी मिली ना कि केवल एक व्यक्ति अहिंसा के अनुकम्पा किया उससे मिला साथियों हमने इतिहास को जाना है क्या आपने यह नहीं पढ़ा कि कैसे जब जब अंग्रेजों के सामने शांति का अनुकम्पा हुआ तब तब अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे ही पीठ पर बंदूकें दागे
यह देश शहीदों का है अमर बलिदानों का है भगतसिंह राजगुरु सुखदेव आजाद सुभाष का है ना कि केवल एक व्यक्ति विशेष का।
हमने कभी नहीं कहा कौन देशद्रोही है और कौन नहीं, मैं बस इतना जानता हूं इस देश का आधारभूत संरचना प्रभू श्री राम का नीति से बना है और जब कोई इसी पथ पर चलकर और जब कोई अधिकार क्षेत्र के व्यक्ति विशेष इस मानव धर्म का पालन करने में संकोच करते दिखे तो श्री राम के नीति अनुसार उसका बद्ध कर ही देना चाहिए जैसे प्रभू श्रीराम ने रावण का किया था भले ही लावण कितना बड़ा पंडित था।
भारत का पहचान पृथ्वी राज चौहान से,महाराणा प्रताप,चाणक्य, चंद्रशेखर आजाद वीर कुंवर सिंह राजगुरु सुखदेव से है।
क्रांतिकारी जब भी बना है कोई वह किसी ना किसी विपरीत परिस्थितियों के सामने अंतिम शस्त्र समझ कर बना है।
हम जानते हैं जीवन जीने का आधार ही शांति है मगर वह कौन सा शांति जब केवल अत्याचार हो रहा हो,जब बच्चे को कत्ल किया जा रहा हो बेटियों का बालात्कार हो रहा हो और अपना विनाश सामने दिख रहा हो तो केवल एक अस्त्र बच जाता है कि पार्थ शस्त्र उठा और अन्याय के लिए बूराई का अंत करो शायद आज का भारत और उस वक्त का भारत में यही फर्क रहा होगा। आपको अंदाजा भी नहीं उस वक्त एक तरफ हजारों लोग मर कट रहे थे बम से उड़ाया जा रहा था बेटियों को बालात्कार किया जा रहा था दूसरे तरफ शांति शांति पूर्वक आंदोलन। श्रीमान हमने अंग्रेजी हुकूमत से पहले हजार साल मुगलों की भी खंजर वाले दर्द से निकले भी नहीं थे अंग्रेजों का गला घोंट नीति जारी था। यह पूर्णतया सत्य है कि मुगलों को शांति पूर्वक आंदोलन से नहीं भगाया गया भारत मां के लाखों बेटा ने प्राण का आहूति दिया और
वैदिक सभ्यता का असर उस समय ऐसा था कि उच्च वर्गो ने अन्य वर्गों को हथियार नहीं उठाने दिया और यह कारण भी एक जिसके कारण आज भी ब्राह्मणों और क्षत्रिय का जनसंख्या कम है १२,१३% है क्योंकि धर्म के लिए आगे आकर लङते कटते मरते गये आज से कुछ दिन पहले सांभा जी का जयंती था आपको पता होगा ही सांभा जी को प्रत्येक दिन एक एक अंग काटा जाता था ताकि वो तङप तङप कर दुसरे धर्म को अपना लें मगर उन्होंने एक लम्बा समय बाद भी अपना सनातन धर्म नहीं बदला और अंत में उनकी मृत्यु हुई।
मैं पुछता हुं जब हमे पता था 1600 इस्वी से ही यह सबकुछ हो रहा है और 1857 में मंगल पांडे ने उदाहरण भी दे दिया कि ये अंग्रेजी हुकूमत ऐसे नहीं मानेगी तो फिर ये लाखों करोड़ों को मरने पर कैसा शांति आंदोलन?
सभी तबकों के लोग गांधी जी के साथ थे, करोङों देशवासि उनका अनुसरण करते थे वे चाहते तो उनके साथ मिलकर क्रांतिकारी विचारधारा के साथ अपना हाथ खोल सकते थे मगर फिर भी सवीनय अवज्ञा आंदोलन वापिस ले लिया गया। चूंकि गांधी जी एक संदेश बनना चाहते थे कि जीवन शांति पूर्वक ही जिया जा सकता है। सुभाष चंद्र बोस जैसा महान देशभक्त महान हस्ती जिन्होने सम्पूर्ण विश्व में भारत के लिए भारतवासी का एकता संदेश फैलाया हम सरदार वल्लभ भाई पटेल को कैसे भूल सकते हैं। याद किजिए एक एक व्यक्ति को जोड़कर नागालैंड मेघालय होते हुए अपने हजारों सैनिकों के प्राण गंवा कर भी देश में पहला आज़ादी का झंडा गाड़ने वाला सुभाष? याद किजिए सभी स्टेट को एक अखंड भारत बना कर रखने वाला सरदार वल्लभ भाई पटेल मगर आजतक इनका कभी चर्चा नहीं किया जाता रहा मगर एक व्यक्ति का महिमा मंडन हमेशा किया जाता है। दिन हर शुभअवसर पर एक ही चर्चा दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल क्या यह पूर्ण रुप से सत्य है? एक देश को अपने क्रांतिकारी विचारधारा को खत्म नहीं करना चाहिए मगर भारत में अब भारत मां का बेटा बस शांति का अनुकम्पा गा रहा है उन क्रांतिकारीयों को भूला दिया गया और भूलाने का हर संभव प्रयास किया गया।
साथियों मैं गांधी जी का आदर करता हूं उनका सम्मान करता हूं और उनके ही रास्ते पर चल कर कोई खुशहाल जीवन जी सकता है। परन्तु समय आने पर बेझिझक भगतसिंह, राजगुरु सुखदेव आजाद सुभाष बन जाना चाहिए ताकि धरती मां सुरक्षित रहें।
My own Creation :- कृष्णा मिश्रा