आजुक मुंह फट्ठ सब फट सँ कहि उठताह हम त भगतसिंह छी जखन की हुनक फ्यूचर वीजन सुनबै त छूबुधि लागत जे एहन कोन नायक हुनक इ आभास नहिं जे भगतसिंह बनबा वास्ते स्वार्थ के निस्वार्थता निति के भीतर आनै परैत छैक। आखिरकार निष्कर्षत: कहल जा सकैत अछि जे एकटा भीङ के सरदार बनाबाक वास्ते सभ रुप धरै लेल लोक तैयार भ जाएकै जखन की एहन बोल महत्वहीन थिकाह। ओना अहि क्षण आहां सभके बताबैत खुशी भ रहल जे आजूक दिन भारत वर्ष लेल गौरवमई अछि 28 सितम्बर 1907 के दिन ही भारत मां एकटा क्रांतिकारी पुत्र के जन्म देलैन्हि जे सम्पूर्ण विश्व में भारत के अनोखा पहचान दियेलाह। 

भारत मां के बहुत कर्तव्यनिष्ठ पुत्र में भगतसिंह सेहो एकटा पुत्र भेलाह जे अंग्रेजी हुकूमत के तहस नहस क देलथि भगतसिंह के अमर छवि अनन्त काल तक लोक लेल प्रेरणा के विंदू श्रोत बनल। वर्तमान स्थिति में किछु लोक के देख रहल छीयैन जिनका भीतर खोखला क्रांति के एकटा पैघ राजनीतिक केंद्र बनि रहल हालांकि अहि सँ हमरा कुनू दु मत नहिं मुदा क्रांति के नाम पर दोहरा चरित्र एकटा संस्कृति वास्ते सच्चा सिपाही के प्रयास हेतु बाधक होएत छैक।

भविष्य के चुटपुटीया नेता
अपना आपके लोक के आजुक भगतसिंह बताबै वाला आ टारगेटेड दू चारि लोक के मुंह स इहै बात के दोहराबै वाला कृपा क क शहीद #भगतसिंह के नाम एना नहिं उछालल करु कियैकी श्रृष्टि के अंत तक इ नाम मानवता आ देश धर्म के लेल सच्चाई के एक प्रतिक बनि कय रहतै।
क्रांति स्वर बजबा लै निस्वार्थता आवश्यक छैक मुदा आजुक समय में निस्वार्थता के कोनो मोल नहिं निस्वार्थ लोकक उपहास उड़ायल जाएत छैक। मनुख जँ निस्वार्थता निति अपनेबो करैत छथि त हुनक अनुसरणकर्ता ओतेक नहिं भ पाबैत छैक जतेक एकटा स्वार्थी राजनितिज्ञ के होएत छन्हि इहो एकटा पैघ कारण छैक जे भीङ के दिशा स्वार्थी शब्द सुनबा लै उत्प्रेरित करैत छैक।
अहि देश के लेल प्राण गवाबै वला क्रांतिकारी परिवर्तन के मिशाल छथि भगतसिंह
भगतसिंह के चरण कमल के धूल के बराबर के बनै के के लेल सबस पहिने अप्पन #राजनीतिक_मानसिकता के तिलांजलि देबै पङत आ आहां स इ हैत नहिं कियैकी आहांक गुरु जिनका आहां आजाद कहैत छियैक ओ सबस पैघ राजनीतिक खिलाड़ी छथि। तैं कृपा कय क भगतसिंह बनै के आकांक्षा खत्म करु हां ओ करु जे करैत छी अब अहीं सोचू आहां की करैत छी।

ओना आजादी काल में जे कियो राजनीतिक आकांक्षा स देश के आजाद कराबै के मूहिम में आगा एलैथ इतिहास त हुनको याद रखने छथि लेकिन ओय में स करीबन 98% बदनाम छथि अप्पन मशहूर होमय के कारण कियैकी हूनक जे लीडर रहथि ओ केवल राजनीतिक जङी बूटी अप्पन अनुयायि के देलाह आ वैह लोक बाद में नहूंए नहूंए नंगटा होएत गेलाह।
दरअसल ओय वक्त जे जरुरी छल ओ केवल भगतसिंह राजगुरु सुखदेव समझ सकलाह आ आज़ाद फौज सनक समूह व किछु क्रांतिकारी आ इ खुशकिस्मती रहैक भारत सनक देश के कियैकी देश के आजादी दियाबै में इहै सब समूह के केवल योगदान रहलैन्हि।
हमरा नहि बुझल आहां इ पढ़ि कय हमरा लेल अप्पन मोन में आहां की विचार बनायब हम त बस अतबा बूझै छी जे इ सत्यता के अनठायल नहिं जा सकैत अछि।
देशज शब्द में भारत वर्ष के बेटा कहाबै वला एक एहन शख्स जे दुनिया के भारतवर्षक परिचय सर उठाकए फांसी के फंदा के चूमि कय झूलि गेलाह इ कैहत जे भारत मां मेरे जाने से तुम्हारी आजादी तय है। एहन क्रांतिकारी पुत्र सँ धन्य अछि ओ मां आ धन्य अछि भारतक कण कण केर माटि।
#bhagatsingh
भारत मां🇮🇳 के पुत्र देश के अनन्य सेवक आदरणीय श्री शहीद भगतसिंह क्रांतिकारी जी के जन्म तिथि पर विनम्र पुष्पांजलि।💐💐💐💐💐💐💐💐🙏💐💐💐💐💐💐💐💐
1907 के 28 सितम्बर भारत के इतिहास में अनन्त काल के लिए शब्द शहीद भगतसिंह नाम के स्वर्णाक्षर में दर्ज राखत। भारत भूमि के गौरवमय इतिहास बनाबै वला तमाम क्रांतिकारी भारत मां के धन्य धन्य कय देलक।
हे भारत भूमि के साहसी वीर अप्पन संस्कार अप्पन संस्कृति अप्पन संस्कृत वास्ते कखनो अप्पन परिचय अंधकार के रूप में नहिं दियह। जीवन के अंतिम छोर पर केवल यैह देखल जाएत छैक क्या खोया क्या पाया और ओहि आंकलन में रुपया कौङी कुर्सी काया कथू के कोनो मोल नहिं रहि जाएत छैक सवाल आ जवाब इन्सानी फितरत मोताबिक होएत छैक। इ सभ क्रांतिकारी जाएत जाएत हमरा आहां लेल एकटा समाद उदारहरण रुप में छोङलथि अतः क्रांतिकारिता के बीच राजनीतिकता तुच्छ और दृष्टिहीन होएत छैक अतः अहि सँ उप्पर उठि कय सोचबाक चाही। इ देश अप्पन हजारों बेटा के खोने अछि ताहिक दम पर भारत के आजादी भेटल दुःखद बस अतबा रहतैक अहि देश के जे आजादी उपरांत 70,80 साल बादो संस्कृत के मजगूत नहिं कैल जा सकल। भारत के परिचय संस्कृत सँ ही होमाक चाही अहि देश के भूखंड संस्कृत के उच्चतम कोटि तक दर्शाबैकै अतः इ जिम्मेदारी नव पीढ़ी के विरासत में भेटलैकै। हे भारत माता के सवा सौ करोड़ सुपुत्र अप्पन संस्कृति अप्पन संस्कार अप्पन संस्कृत नहिं बिसरू अतः नहिं बिसरु क्रांतिकारी शहीद भगतसिंह के जँ चुटपुटिया नेता बनबाक राजनीतिक आकांक्षा राखैत छी त क्रांतिकारी विचारधारा के महानायक भगतसिंह के नाम पर समाज के बीच गलत संवाद नहिं पसारु।

हे भारत मां तुम्हारा क्रांतिकारी बेटा भगतया सदैव इस भारत मां निस्वार्थी पुत्र के नाम से ही जाना जाएगा।
प्रेरणादायक भगतसिंह के प्रणाम