कल केवल एक आज़ाद था शहिद चंद्रशेखर आजाद
कल केवल एक आज़ाद था शहिद चंद्रशेखर आजाद

मैं आज़ाद मैं आज़ाद हूं मैं आज़ाद रहूंगा
चंद्रशेखर का अर्थ शिव अर्थात महादेव, महादेव का अर्थ सबसे बड़ा देवता वो देवता जिनका आसन सभी देवताओं में सबसे उपर विराजमान होता है। आज़ाद का अर्थ ही होता है स्वच्छंद अर्थात स्वइच्छानुकूल आचरण करने वाला अर्थात बिना भय बिना संकोच का निर्णय लेने वाला। आप सोच रहे होंगे इतना विस्तार में केवल दो शब्द चंद्रशेखर आजाद को क्यों वर्णन किया जा रहा है जी हां आप सही सोच रहे हैं क्योंकि कभी कभी इस तरह का विचार आना भी लाज़मी है। नमस्कार आप पढ़ रहे हैं उस शख्स के बारे में जिनका नाम ज़ुबान पर आते ही एक अलग सी रहनुमा अहसास जगती है कैसे बनाया होगा सबकुछ खाश अपने जीवन में। बहुत ही रोचक अनुकरणीय तथ्य आने लगता है सामने। जब चर्चाएं चलती है जब एक सच्चाई की बातें निकल कर सामने आती है तो खुली किताब कि तरह आंखों के सामने एक एक कर के सबकुछ साफ साफ झलकने लगता है। चंद्रशेखर आजाद भी उन्हीं झलकते सितारों की झलकियां है जो अतीत के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित है क्या आप इस अच्छरों के अहसास को समझना चाहते हैं। हमें अपने अतीत को कभी नहीं भूलनी चाहिए यह हमें एक खास सिख के लहज़ा में भविष्य के लिए एक अनुभव होता है।

कल आज़ाद कौन था आज आजाद कौन है?
आज़ादी कि चर्चा हो और आज़ाद का चर्चा ना हो सवाल ही नहीं उठता इसलिए आजादी के साथ आजाद को समझना पड़ेगा। आज आजाद हर एक वो शख्स है जिसे पहनने ओढ़ने बोलने और नियम कानून के दायरे में आवाज उठाने का फंडामेंटल राइट्स है। आज एक छोटी सी छोटी बातों के लिए आंदोलन की रुप रेखा तैयार कर दी जाती है। जनता जनार्दन में इतनी शक्ति है कि वो एक गुट बना कर भी सरकारी तंत्र के नाक में दम डाल सकती है यह साफ़ है हम अमन चैन की सांस एक आजाद मुल्क में ले रहें हैं। मगर एक सवाल फिर उठता है, कल आज़ाद कौन था? इस आजादी के लिए लङने वाला में से एक शख्स था जिसका नाम था चंद्रशेखर आज़ाद उन्होंने अपना नाम में आज़ाद स्वयं लगाया था। चंद्रशेखर आजाद ने कभी नहीं हारने वाला ज़ंग लङा अपने मातृभूमि से इस तरह प्रेम जिसका वर्णन सुंदर से सुंदर किताबों में विवेचीत है। उस काला काल में सभी भारतीय थे अंग्रेजों के गिरफ्त में अंग्रेजी हुकूमत के डर से सभी कांप उठते थे मगर उन्हीं भीङ मे छुपा था कुछ कोहिनूर जिसमें से एक का नाम था चंद्रशेखर आज़ाद। दरअसल आज़ाद भारत का सपना था और आजाद का सपना था भारत की आज़ादी उन्होंने अंग्रेजों को नानी याद दिला दी।
जी हां भारतवर्ष एक ऐसा देश है जो अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बेखौफ ज़ंग लङ कर आजादी हासिल किया है।

शहिद चंद्रशेखर आज़ाद का जीवन परिचय
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी का परिचय इस देश के कण-कण में व्याप्त है । 23 जुलाई 1906 को जन्म हुआ आज़ाद का भाबरा जो कि मध्यप्रदेश के अलिराजपुर जिले अंतर्गत आता है। भाबरा गांव के मिट्टी की खुशबू आज भी इंगित करता है भारत माता के पुत्र आजाद ने किस ललक से अपने मातृभूमि के सेवा में समर्पित होकर कम आयु में देश के लिए अमिट छाप छोड़ गए। वे एक होनहार बुद्धिमान शख्स थे जिनके आंखों में आंशू आता था जब कभी मां भारती के पांव में बंधे जंजीर का जिक्र होता था। वे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के एक मेधावी छात्र थे, शहिद चंद्रशेखर आज़ाद को बचपन से ही क्रांतिकारी सोच का नक्शा क़दम पता था।
कल केवल एक आज़ाद था शहिद चंद्रशेखर आजाद
जैसे ही गांधीजी का असहयोग आंदोलन अचानक बंद हुआ वैसे ही वे अपने आप को बदलकर क्रांतिकारी विचारधारा में स्वयं को ढाल कर हिंदूस्थान रिपब्लिकन एसोसिएशन ज्वाइन कर लिया। उनका प्रिय मित्र था राम प्रसाद बिस्मिल जिनके साथ मिलकर उन्होंने काकोरी काण्ड को अंजाम दिया था और फरार हो गए। समय बितता गया क्रांतिकारी कदम और सशक्त होते चले गए आगे आकर उन्होंने उत्तर भारत के क्रांतिकारीयो को साथ लेकर सभी छोटे बड़े क्रांतिकारी पार्टीयों को साथ लेकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन गठन किया। यह वह समय था जब भगतसिंह के साथ लाहौर में लाला लाजपत राय की बदला sandars को हत्या कर के लिया और फिर दिल्ली पहुंच कर असेंबली में बम फैंक कर असेम्बली बम काण्ड का अंजाम दिया। 27 फरवरी 1931 को यह चमकता हुआ सूरज सदा के लिए सो गया प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में जब इन्हें चारों ओर से अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा घेर लिया गया। इन्होंने हार नहीं माना इन्होंने गिरफ्तारी नहीं दिया ये अकेला लङते हुए और जब इनकी बंदूक में केवल एक ही बुल्लेट बचा था तो इन्होंने खुद को गोली मार लिया। अंतिम गोली के साथ मिट्टी को माथे में लगा कर भारत मां को अंतिम प्रणाम किया और यह कैहते हुए आजाद ने अपनी अंतिम सांसें छोड़ा। उन्होंने कहा मां मुझसे बस इतना ही सेवा हो सका माफ़ करना माते मुझसे इतना ही सेवा हो सका।
आपको यह जानकर दुःखी होगा चंद्रशेखर आजाद का गुप्त जानकारी अंग्रेजों को देने वाला कोई भारतीय ही था और वह भारतीय को अंग्रेजी हुकूमत का डर था इसलिए वो आजाद नहीं था।
आजाद का बलिदान सम्पूर्ण भारतवर्ष के लिए एक सदमा था सदमा ऐसा था जिसका जिक्र नहीं कर सकते हैं। उनके नाम से सभी के आंखें नम थे सभी लोग आज़ाद के राख को अपनी घर के भगवानों के तरह मानने लगें। आजाद के बलिदानों की ख़बर जब कमला नेहरू को हुई तो उन्होंने इस खबर को सभी कांग्रेसी नेताओं को दिया अन्य क्रांतिकारी का तो मानो सांसें थम सा गया शायद अब कुछ शेष नहीं बचा।
कल केवल एक आज़ाद था शहिद चंद्रशेखर आजाद
चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारीयो पर देश गर्व करता है। हमें अपने पुरखों पर गर्व है उनके बलिदानों को हम जाया नहीं जानें देंगे एक स्वस्थ सुंदर प्रगतिशील भारत बनाएंगे जहां हर क्षेत्र में भारत सर्वोच्च हों।
जय मां भारती वंदे मातरम् जय हिन्द