मैथिल समाज के लिए कौन खङा?
आजकल युवा आवाज तो उठाना चाहते हैं समाज के बेहतर भविष्य के लिए परंतु अभिभावकों की चुप्पी उनके मुंह को ही सी डालता है मानो अब सुई भेद दी गयी हो। हम उन सभी बुजुर्गो से पूछना चाहते हैं, जिम्मेदारी आपके मत्थे भी तो थी कैसे नहीं कहूं, सिर्फ उम्र काफी नहीं होता है। प्यारे मैथिलो क्या आपने कभी सोचा है।
हम अपने अलंग को काटते जा रहे हैं।
                            बोलो कैसे?
एक शब्द में उत्तर बोलूं तो मिथिला रिजन जो कि उत्तर बिहार में आता है वह पलायन (gateway) के वजह से अपना अलंग काटते जा रहा है, काटते जा रहा है मुझे नहीं पता migration करने वाले की सोच क्या रहता है मगर इतना तो स्पष्ट है जिसे पेट के खातिर अपना घर-बार छोड़कर बिना बात पलायन के कारण निकलना पड़ा उसने अपने स्वाभिमान से जरुर समझौता किया होगा या फिर करने में लगा होगा। क्यों नहीं कहूं हमारे क्षेत्र में ढंग का एक इंडस्ट्री नहीं कोई कल-कारखाना नहीं
मैं यह भी स्पष्ट कर रहा हूं आने वाले समय में बीत रही यह पीढ़ी इस बात को बखूबी explore करेगा हमारे बीते 7,8 दशकों वाले अभिभावक का मिथिला मैथिली प्रति प्रेम कैसा रहा था यह बात 1950 के बाद और 1990 से पहले वाले पीढ़ी पर लागू होती है क्योंकि जिम्मेदारी उन्हीं के मत्थे थी।

आजादी से पहले का इतिहास यह कैहता है हमारा मिथिला समृद्ध सशक्त और शक्तिशाली रहा करता था लेकिन अंग्रेजी हुकूमत और विदेशी आक्रांताओं के कारण यह जर्जर होता गया। आजादी के बाद तो सभी राज्य का स्थिति एक जैसा ही था मगर बढ़ते वक्त में सभी राज्य आगे बढ़ा लेकिन उस समृद्ध मिथिला जिसका इतिहास किसी स्वर्ग से बेहतर था आज वह स्वयं में कैसे जूझ रहा इसको कुछ शब्द में कैसे लिखूं समझ में नहीं आता हमने अपने भारत माता की आजादी के लिए अपनी भाषा अपनी लिपि तक को दांव पर लगाने से नहीं चुका जी हां हमने हिंदी समृद्धता के लिए अपना मैथिली लेखनी छोर चला मगर आज स्थिति दुसरी है सभी राज्य आगे बढ़ रहे हैं पलायन कि मार सिर्फ मैथिल पर ही क्यों


यह सच्चाई है हमने दशकों बाद इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के हैसियत से सरकार से मांग करने को आवाज उठाता रहा कि पलायन रोकने हेतु मिथिला पक्ष में कुछ अलग सा व्यवस्था किया जाए जिससे पलायन कम हो सके और 7 करोड़ मैथिल अपने क्षेत्रीयता के सरजमीं से राष्ट्रीयता के शेखर तक देश का गरिमा बढ़ाने में आगे आ सके पिछले कई सालों से हमने यह मांग उठाते आया
क्या मिथिला विकास के लिए आवाज उठाना अपराध है?
वो अभिभावक भी कैसे नहीं दोषी हैं जो हमेशा से मौन हैं समाज के प्रति क्यों भविष्य को आयना दिखाने में लगें हैं कि वो कान में तेल डाले सोये सबकुछ देख रहे हैं?
मैथिली का अपमान नहिं त और क्या है यह?मिथिला के लिए मांग उठाने वाले को नजरंदाज कर दिया जाता है।
मैं इस मुर्दा समाज को आयना दिखाना चाहता हूं कि वो आप ही है जो मुख्य कारण बन कर रह जाएंगे जैसा अतीत होता है जिसके शयन यान के कारण हम पलायन करने को समाज का बच्चा मजबूर होता है। हममे अभी तक भी मैथिल एकजुटता कहीं नहीं नजर आ रही है । क्या जो मुद्दा हमने उठाया वह व्यक्ति विशेष का था?
Trust me I would like to write the  real story of the Maithil, what kind of Maithil they want to be
मैं आसाम में काफी दिन रहा आसामी अभिभावकगण को देखा वो कितने सजग हैं अपने संस्कृति अपने बच्चों अपने हक्क अपने स्वाभिमान के लिए और इस अनोखा क्षेत्र प्रेम को मैं शब्द में बयां नहीं कर सकता
मैंने वहां के STUDENT UNION से सिखा कैसे अपने क्षेत्रप्रेम के लिए कुछ भी कर जाते हैं लोग और इसी क्षेत्र प्रेम के कारण आज आसाम भारत के गिने-चुने विकसित राज्य में से एक है।
आपका क्षेत्र देश की उन्नति में भरपूर योगदान करें इससे अधिक राष्ट्रीयता और क्या हो सकता है?
मिथिला में अधिकांश मैथिल बिना बात का नेताओं का झंडा ढोता है वह भी किसी नेता विशेष के लिए अपना संस्कृति तक को दांव पर लगा देना चाहता है हमें इस मानसिकता से निकलना होगा हमें चाहिए कि हम अपनी भाषा संस्कृति लिपि को संरक्षित  करें।
Created by:- कृष्णा मिश्रा